Monday, 3 October 2022


          वर्तमान समय में तनाव एवं दुश्चिंता का प्रकोप व्यक्ति- व्यक्ति के ऊपर इस कदर छाया हुआ है कि आज हमारा जीवन एक बोझ में बदल गया है। लोगों के चेहरे से हंसी -मुस्कुराहट विदा हो चली है। घर परिवार में अनावश्यक कलह का वातावरण चिंताजनक है। समाज विघटन के हाथों चढ़ा हुआ है। हिंसा, आतंक अराजकता  के अलावे तरह-तरह की  व्याधियों ने  मनुष्य के शरीर पर हमला बोल दिया है, फलस्वरूप जो जीवन हर्ष, उल्लास, प्रसन्नता से सिक्त होना चाहिए था, वह बेहद हैरान, परेशान, दुखी, चिंतित दिखाई पड़ता है। जो जीवन शांति- प्रेम और सद्भावना से भरा -पूरा होना चाहिए था उसमें समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। इसमें अश्लील गानों की कर्कश ध्वनि, दिल दहलाने वाली आवाज, रोड छाप मनचले युवकों की छेड़खानी, छींटाकशी, नशे के बेलगाम बढ़ते प्रकोप ने प्रायः सभीपर्वों में,  छठ पर्व को छोड़कर,  रंग में भंग घोल दिया है। विधि व्यवस्था की स्थिति भगवान भरोसे है. . . . . !

Thursday, 28 April 2016

2015 में रोजगार वृद्धि दर सात वर्ष के निचले स्तर पर:श्रमिक सर्वे

रत्न आभूषण, हथकरघा, चर्म और वाहन उद्योग समेत देश के 8 प्रमुख श्रम गहन उद्योगों में पिछले साल (2015) रोजगार सृजन 7 साल के न्यूनतम स्तर पर रहा है। इस बात की जानकारी सर्वे में दी गई है।श्रम ब्यूरो के सर्वे के अनुसार:2015 में इन क्षेत्रों में 1,35,000 रोजगार के अवसर सृजित हुए। जबकि 2014 में 4.21 लाख रोजगार के अवसर प्रदान किए गए थे। 2013 में 4.19 लाख रोजगार के अवसर प्रदान किए गए थे। 2012 में 3.21 लाख रोजगार के अवसर प्रदान किए गए थे।2011 में 9.29 लाख रोजगार के अवसरों का सृजन किया गया था। 2010 में 8.7 लाख रोजगार के अवसरों का सृजन किया गया था। 2009 में 12.8 लाख रोजगार के अवसर प्रदान किए गए थे।सर्वे के अनुसार पिछले वर्ष की अक्टूबर दिसंबर की तिमाही में इन 8 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उससे पहले तिमाही की तुलना में रोजगार के 20,000 अवसरों का नुकसान हुआ। जुलाई से सितंबर की अवधि में उससे पिछली तिमाही की तुलना में इन क्षेत्रों में 1.34 लाख रोजगार के अवसर बढ़ाये थे।ब्यूरो जनवरी 2009 से इन तरह का सर्वे कर रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव का इन 8 क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के प्रभाव का आकलन करना है। इन क्षेत्रों में वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा, धातु, वाहन, रत्नाभूषण, परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी, बीपीओ और हैंडलूम, पावरलूम जैसे चुनिंदा क्षेत्र शामिल हैं।श्रम ब्यूरो:श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन श्रम ब्यूरो मजदूरी, आय, उत्पादकता, अनुपस्थिति, श्रम कारोबार, औद्योगिक संबंधों आदि पर आंकड़ों और संबंधित जानकारी के संग्रह तथा प्रकाशन के लिए जिम्मेदार है।यह औद्योगिक, खेतिहर तथा ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, मजदूरी दर सूचकांक तथा संगठित एवं असंगठित उद्योग क्षेत्र इत्यादि में औद्योगिक संबंधों, सामाजार्थिक स्थितियों पर आंकडों तथा महत्वपूर्ण आर्थिक सूचकांको का संग्रह करता है।श्रम ब्यूरो के कार्यों/क्रियाकलापों को तीन मुख्यशीर्षों में वर्गीकृत किया जा सकता है:श्रम आसूचनाश्रम अनुसंधानन्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत जांच एवं मूल्यांकन अध्ययन
[19/04 9:35 am] दीपक पाठक: भारत, अफगानिस्तान व ईरान के बीच चाबहार सहमति पूर्ण हुआ:

भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह (पोर्ट) परियोजना के काम में तेजी लाने पर सहमति बनी है। इस प्रोजेक्ट से ईरान की मध्य एशिया में पहुंच आसान होगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पहली ईरान यात्रा के दौरान इस मसले पर बातचीत हुई।इस सम्बन्ध में प्रमुख तथ्य:दोनों देशों ने वर्ष 2003 में ओमान की खाड़ी के पास चाबहार बंदरगाह को विकसित करने का फैसला किया था। यह स्थान ईरान की पाकिस्तान से लगी सीमा के बेहद करीब है। दक्षिण पूर्व ईरान स्थित इस बंदरगाह से भारत, पाकिस्तान की मदद के बिना समुद्री मार्ग के जरिये अफगानिस्तान और मध्य एशिया में माल का परिवहन कर सकेगा।पाकिस्तान अपने क्षेत्र से अफगानिस्तान माल भेजने की इजाजत नहीं देता है। हाल ही में उसने अफगानिस्तान से भारत को थोड़े निर्यात की अनुमति देना शुरू किया है। चाबहार प्रोजेक्ट का काम ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध के कारण बेहद धीमी गति से चला है। हालांकि हाल में यह प्रतिबंध हटा लिए गए हैं।अमेरिका की अगुवाई में लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंध के बावजूद दोनों देशों ने आपसी संबंध बरकरार रखे। इन प्रतिबंधों के कारण वर्ष 2014 में प्रतिदिन 2 लाख 20 हजार बैरल तेल का व्यापार घटकर आधा हो गया था।पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के जवाब के तौर पर भारत चाबहार बंदरगाह को विकसित करना चाहता है। ग्वादर बंदरगाह को पाकिस्तान, चीन के सहयोग से विकसित कर रहा है और यह चाबहार से महज 72 किमी दूर है। फरवरी में सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए ईरान में एक कंपनी के गठन के साथ 150 मिलियन डॉलर के 'लाइन ऑफ क्रेडिट' को मंजूरी दी थी।भारत चाबहार में दो पेट्रो रसायन प्लांट लगाने के साथ ही वहां से अफगानिस्तान तक रेलवे नेटवर्क बिछाने की भी मंशा रखता है। अफगानिस्तान सरकार के साथ ही अमेरिका भी इस प्रस्ताव को समर्थन कर रहा है क्योंकि यह अफगानिस्तान की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा सकता है।माना जा रहा है कि ईरान में चीन, जापान, फ्रांस समेत यूरोपीय संघ के तमाम देश जिस स्तर पर निवेश करने को तैयार हैं, उसे देखते हुए भारत को भी ज्यादा तेजी दिखानी होगी। ईरान की तरफ से लगातार इस तरह के बयान आ रहे है कि वह भारत से होने वाले निवेश प्रस्तावों पर जल्द फैसला करेगा। हालाँकि उसने भारत में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर बहुत सुस्ती से कदम बढ़ाने पर ईरान अपनी नाराजगी भी दिखा चुका है।